
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। विरोध की लहर अब तक थमी नहीं है, और बाजार, दुकानें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सब बंद हैं।
29 सितंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब तक 8 जानें ले चुका है, और हजारों लोग सड़कों पर हैं।
‘हम किसी के खिलाफ नहीं, बस हक की बात कर रहे हैं’
जम्मू कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता राजा शोएब ने स्पष्ट किया है कि:
“हम पाकिस्तान के खिलाफ नहीं, हम गरीबों और उत्पीड़ितों की आवाज हैं। एक दिन खुद पाकिस्तान के लोग भी हमारे साथ खड़े होंगे।”
उन्होंने कहा कि आंदोलन भ्रष्टाचार और जनता के अधिकारों के लिए है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए।
पाकिस्तान सरकार ने माना कुछ मांगों को, पर आंदोलन जारी क्यों है?
पाक सरकार और JAAC के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। संसदीय कार्य मंत्री तारिक फजल चौधरी ने बयान दिया कि “ज्यादातर मांगों को मान लिया गया है, लेकिन कुछ के लिए संवैधानिक संशोधन चाहिए।”
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि लोग अभी भी सड़कों पर हैं, दुकानें बंद हैं और POK की राजधानी मुजफ्फराबाद में सन्नाटा पसरा है।
हिंसा से बिगड़े हालात, 8 की मौत
अब तक के विरोध में कम से कम 8 लोगों की मौत हो चुकी है, और दर्जनों घायल हैं। पाक सेना की फायरिंग, और भीड़ पर लाठीचार्ज के आरोप भी सामने आए हैं।
यह प्रदर्शन सिर्फ रोज़मर्रा की समस्याओं या महंगाई के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम में जमी हुई जड़ता के खिलाफ है।
बाजार बंद, पब्लिक लाइफ ठप, लोगों में गुस्सा
विरोध के चलते अब तक:
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बाज़ार लगातार बंद
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दुकानें, दफ्तर, ट्रांसपोर्ट बंद
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शिक्षा संस्थान प्रभावित

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लोकल ट्रैफिक ठप
लोग खुलेआम नारेबाज़ी कर रहे हैं, “ना इंसाफ़ी नहीं चलेगी”, “हमें अधिकार चाहिए” जैसी आवाज़ें हर मोड़ पर गूंज रही हैं।
सरकार कहती है बातचीत करो, लोग कहते हैं जवाब दो
सरकार का कहना है कि “हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है।”
लेकिन जनता का कहना है कि “हमें सिर्फ वादे नहीं, कार्रवाई चाहिए। जब तक ठोस नतीजे नहीं मिलते, आंदोलन जारी रहेगा।”
क्या अब होगी तीसरे दौर की बातचीत?
सूत्रों के मुताबिक, अगर हालात और बिगड़े तो पाकिस्तान सरकार और JAAC के बीच तीसरे दौर की बातचीत जल्द हो सकती है।
JAAC की मांगें साफ हैं:
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बिजली-पानी की उचित आपूर्ति
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भ्रष्टाचार पर कार्रवाई
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POK को संवैधानिक अधिकार
संवेदनशील मामला, लेकिन दबाया नहीं जा सकता
ये सिर्फ POK की नहीं, एक जनआंदोलन की कहानी है, जहां लोग अपने अधिकारों के लिए खड़े हैं। सरकार से अपील है कि संवेदनशीलता और समझदारी से हालात को संभाला जाए।
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